वाकिआए में'राज 0️⃣1️⃣

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*🥀 वाकिआए में'राज 🥀* 



🕋 01

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
      बिअस्त के 11वे साल, हिजरत से दो साल पहले, 27 रजबुल मुरज्जब, पीर शरीफ की सुहानी और नूर भरी रात है महबूबे रब्बे गफ्फार ﷺ नमाज़े ईशा अदा फरमाने के बाद अपनी चचाज़ाद बहन उम्मे हानी के घर आराम फरमा है कि दौलत खाने की मुबारक छत खुली, हज़रते जिब्राइल عليه السلام निचे हाज़िर हुवे और आप को हज़रते उम्मे हानी के घर से मस्जिदे हराम में ला कर हतिमें काबा में लिटा दिया।

*शक़्क़े सद्र*
     अभी प्यारे आक़ा ﷺ यहीं (हतीमे काबा में) करवट के बल लेटे हुवे थे और आप पर ऊंघ का असर बाक़ी था कि हज़रते जिब्राइल फिर हाज़िर हुवे, इस बार उन्होंने आप ﷺ के सिनए पाक को हंसली की हड्डी से लेकर पेट के निचे तक चाक किया और क़ल्बे अतहर को बाहर निकाल लिया। फिर ईमान व हिकमत से भरा सोने का एक तशत (थाल) लाया गया, हज़रते जिब्राइल ने प्यारे आक़ा के क़ल्बे अतहर को आबे ज़मज़म से गुस्ल दिया और फिर ईमान व हिकमत से भर कर वापस उस की जगह रख दिया।

*बुराक़ की सुवारी*
     इसके बाद आप ﷺ की बारगाह में सुवारी के लिये ग़धे से बड़ा और खच्चर से छोटा एक सफेद जानवर हाज़िर किया गया, जिसे बुराक़ कहा जाता है। इस पर ज़िन कसी हुई थी, लगाम पड़ी हुई थी और इसकी रफ़्तार का आलम ये था कि जहाँ तक नज़र पहुंचती वहां अपना क़दम रखता, बुलन्दी पर चढ़ते हुए इसके हाथ छोटे और पाँव लम्बे हो जाते और निचे उतर ते हुऐ हाथ लम्बे और पांव छोटे हो जाते जिस की वजह से दोनों सूरतों में इसकी पीठ बराबर रहती और सुवार को किसी किस्म की मशक्कत का सामना न होता।
     हुज़ूर ﷺ ने जब उस पर सुवार होने का इरादा फ़रमाया और इसके क़रीब तशरीफ़ लाए तो इसने ख़ुशी से फुले न समाते हवे उछल कूद शुरू कर दी। ये देख कर जिब्राइल ने अपना हाथ इसकी गर्दन की बालो की जगह पर रखा और फ़रमाया: ऐ बुराक़! तुझे हया नहीं आती? खुदाए की क़सम! हुज़ूर ﷺ से ज़ीक़द इज्ज़तों करामत वाली कोई हस्ती तुझ पर सुवार नहीं हुई। ये सुन कर बुराक़ हया के मारे पसीने पसीने हो गया और उछल कूद खत्म करके पुर सुकून हो गया।

*▶ बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله*


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