शाने सिद्दिके अकबर*2️⃣2️⃣

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*🥀 वाकिआए में'राज 🥀* 



*🕋 22*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*शाने सिद्दिके अकबर*
     मेराज की बा बरकत रात जब प्यारे आक़ा ﷺ जन्नत में तशरीफ़ लाए तो रेशम के पर्दो से आरास्ता एक महल मुलाहज़ा फ़रमाया। आपने जिब्राइल से दरयाफ़्त फ़रमाया: ये किस के लिये है? अर्ज़ किया: हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ رضي الله عنه के लिये।
     आशिके अकबर हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ رضي الله عنه की क्या खूब शान है! याद रहे कि नबियों और रसूलो के बाद सिद्दिके अकबर رضي الله عنه सबसे अफ़्ज़ल है। आप के फ़ज़ाइल बे शुमार है, रसूले करीम ﷺ पर मर्दों में सबसे पहले आप رضي الله عنه ही ईमान लाए, सफर व हज़र में प्यारे आक़ा के साथ रहे, आक़ा की हमराही में ही हिजरत की सआदत हासिल की और फनाफिर्रसूल के उस मक़ाम पर फाइज़ हुवे की अपना माल, जान, अवलाद, वतन अल गर्ज़ हर शै रसूले नामदार पर क़ुर्बान कर दी। यही वजह है कि बारगाहे खुदा व मुस्तफा में आप رضي الله عنه ने बहुत बुलन्द मरातिब पाए और ढेरों ढेर इनामाते इलाहिय्या के हक़दार भी हुवे।
      *बयां हो किस ज़बान से मर्तबा सिद्दिके अकबर का*
          *है यारे गार महबूबे खुदा, सिद्दिके अकबर का*
     *रुसुल और अम्बिया के बाद जो अफ़्ज़ल हो आलम से*
          *ये आलम में है किस का मर्तबा? सिद्दिके अकबर का*

*हज़रते बिलाल के क़दमों की आहट*
     जन्नत कि सैर के दौरान हुज़ूर ﷺ ने किसी के क़दमो की आहट समाअत फ़रमाई जिसके बारे में आपको बताया गया कि ये हज़रते बिलाल رضي الله عنه है!
     क़ुर्बान जाइये! क्या शान है मुअज़्ज़िने रसूल बिलाल हबशी رضي الله عنه की, कि प्यारे आक़ा इनके क़दमो की आहट जन्नत में समाअत फरमा रहे है। आप رضي الله عنه को ये मक़ाम किस अमल के सबब हासिल हुवा? आइये! मुलाहज़ा कीजिये: हज़रते अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत है, एक दफा हुज़ूर ﷺ ने फज्र के वक़्त हज़रते बिलाल رضي الله عنه से फ़रमाया: ऐ बिलाल! मुझे बताओ तुमने इस्लाम में कौन सा ऐसा अमल किया है जिस पर सवाब की उम्मीद सबसे ज़्यादा है क्योंकि में ने जन्नत में अपने आगे तुम्हारे क़दमों की आहट सुनी है। अर्ज़ किया: मेने अपने नज़्दीक कोई उम्मीद अफ़ज़ा काम तो नहीं किया। हाँ! मेने दिन रात की जिस घड़ी भी वुज़ू या गुस्ल किया तो इस क़दर नमाज़ पढ़ली जो अल्लाह ने मेरे मुक़द्दर में की थी।
     यानी दिन रात में जब भी मेने वुज़ू किया तो दो नफ्ल तहिय्यातुल वुज़ू पढ़ ली।
     ख्याल रहे की हुज़ूर ﷺ का बिलाल رضي الله عنه से ये पूछना इसलिये था ताकि आप ये जवाब दे और उम्मत इस पर अमल करे, वरना हुज़ूर ﷺ तो हर शख्स के हर छुपे खुले अमल से वाक़ीफ़ है।

*ज़बरजद और याकूत के ख़ैमे*
     जन्नत की हसीनो जमील और प्यारी वादियों की सैर फ़रमाते हुवे प्यारे आक़ा ﷺ एक नहर पर तशरीफ़ लाए जिसे बैज़ख़् कहा जाता है। उस पर मोतियों, सब्ज़ ज़बरजद और सुर्ख याक़ूत के ख़ैमे थे। इतने में एक आवाज़ आई: अस्सलामु अलैक या रसूलल्लाह। 
     आप ﷺ ने जिब्राइल से दरयाफ़्त फ़रमाया ये कैसी आवाज़ है? अर्ज़ किया: ये ख़ैमों में पर्दा नशीन हूरें है, इन्होंने रब से आप को सलाम कहने की इजाज़त तलब की थी और रब ने इन्हें इजाज़त अता फरमा दी। फिर वो हूरें कहने लगी: हम खुश रहने वालियां है कभी ना-गवारी व नफरत का बाइस न होंगी और हम हमेशा रहने वालियां है कभी फना न होंगी।

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله


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