बैतूल मुक़द्दस की तरफ रवानगी0️⃣2️⃣

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*🥀 वाकिआए में'राज 🥀* 



*🕋 02*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*बैतूल मुक़द्दस की तरफ रवानगी*
     हुज़ूर ﷺ बुराक़ पर सुवार हुवे और इस शान से बैतूल मुक़द्दस की तरफ रवाना हुवे जैसा कि हज़रत अल्लामा बुसैरी رحمة الله عليه फ़रमाते है: आप ﷺ ने में'राज की शब् हरमे काबा से हरमे बैतूल मुक़द्दस तक इस शान से सफर किया जैसे चौदवीं रात सख्त तारीक रात के अँधेरों में नूर बिखरता हुवा चलता है।
     इस नूरानी सफर में फरिश्तों के सरदार जिब्राइल भी आप के साथ थे।

*तीन मक़ामात पर नमाज़*
     दौराने सफर एक मक़ाम पर जिब्राइल ने हुज़ूर ﷺ को उतर कर नमाज़ पढ़ने को कहा। आप ने नमाज़ अदा फ़रमाई। जिब्राइल ने अर्ज़ किया आप को मालुम है कि आप ने किस जगह नमाज़ पढ़ी है? आप ने तयबा (मदीना शरीफ) में नमाज़ पढ़ी है, इसी की तरफ हिजरत होगी। 
     फिर एक और मक़ाम पर जिब्राइल ने आप ﷺ को उतर कर नमाज़ पढ़ने के लिये कहा। आप ﷺ ने नमाज़ अदा फ़रमाई। जिब्राइल ने फ़रमाया आपने तुरे सीना पर नमाज़ पढ़ी है जहाँ अल्लाह ने हज़रते मूसा عليه السلام को हम कलामी का शरफ अता फ़रमाया था।
     फिर एक और जगह जिब्राइल आप को उतर कर नमाज़ के लिये कहा। आप ﷺ नमाज़ अदा फ़रमाई। जिब्राइल ने फ़रमाया आप ने बैते लहम में नमाज़ पढ़ी है जहाँ हज़रते ईसा عليه السلام की विलादत हुई थी।

*सफरे बैतूल मुक़द्दस के चन्द मुशाहदात*
     कुदरत के अजाइबात का मुशाहदा फ़रमाते हुवे हुज़ूर ﷺ बैतूल मुक़द्दस की तरफ रवां दवां थे कि रास्ते के किनारे एक बुढ्ढि औरत खड़ी हुई देखि, आप ﷺ ने जिब्राइल से दरयाफ़्त फ़रमाया: ये कौन है? अर्ज़ किया बढ़े चलिये। आप आगे बढ़ गए, फिर किसी ने आप को पुकार कर कहा ऐ मुहम्मद (ﷺ) इधर आइये। लेकिन जिब्राइल ने फिर वही अर्ज़ किया कि हुज़ूर बढ़े चलिये। चुनांचे आप रुके बगैर आगे बढ़ गए फिर एक जमाअत पर गुज़र हुवा। उन्हों ने आप ﷺ को सलाम अर्ज़ करते हुवे कहा: ऐ अव्वल ﷺ आप पर सलामती हो, ऐ आखिर ﷺ आप पर सलामती हो। ऐ हाशीर ﷺ आप पर सलामती हो। जिब्राइल ने अर्ज़ की इनसे सलाम के जवाब मर्हमत फरमाइये। आप ﷺ ने जवाब दिया। फिर एक दूसरी जमाअत पर गुज़र हुवा वहां भी ऐसे ही हुवा, फिर तीसरी जमाअत पर गुज़र हुवा वहां भी ऐसे ही हुवा।
     बाद में जिब्राइल ने आपﷺ की बारगाह में अर्ज़ किया: वो बुढ़िया जिसे आप ने रस्ते के किनारे खड़ी देखि थी वो दुन्या थी इस की सिर्फ इतनी उम्र बाक़ी रह गई है जितनी उस बुढ़िया की है। जिसने आप को अपनी तरफ माइल करना चाहा था वो अल्लाह का दुश्मन इब्लीस था, चाहता था कि आप उस की तरफ माइल हो जाए और जिन्होंने आप को सलाम अर्ज़ किया था वो हज़रत इब्राहिम व मूसा व ईसा عليه السلام थे।

*हज़रते मूसा عليه السلام नमाज़ में*
     सहीहुल मुस्लिम शरीफ की रिवायत में है कि जब आपﷺ का गुज़र हज़रते मूसा عليه السلام की क़ब्रे मुबारक के पास से हुवा जो रेत के सुर्ख टीले के पास वाकेअ है, तो वो अपनी क़ब्र में खड़े नमाज़ पढ़ रहे थे।

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله


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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*

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