अज़ाबे इलाही से मुतअल्लिक़2️⃣6️⃣

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*🥀 वाकिआए में'राज 🥀* 



*🕋 26*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*अज़ाबे इलाही से मुतअल्लिक़* #07

*ज़िनाकारों के अज़ाब*
     ज़ीना इन्तिहाई घिनावना और घटया फेल है। क़ुरआन व हदीस में इस से बचने की बहुत ताकीद आई है और जो इसका इरतिकाब करे उसके लिये सख्त सज़ाएं वारिद है।
     अल्लाह फ़रमाता है: और बदकारी के पास न जाओ, बेशक वो बे हयाई है और बहुत ही बुरी राह।
بنى اسراىٔيل ٣٢
     मुफ़्ती अहमद यार खान नईमी رحمة الله عليه इसकी तफ़सीर में फ़रमाते है: ज़ीना के अस्बाब से भी बचो लिहाज़ा बद नज़री, गैर कैरट से खलवत, औरत की बे पर्दगी वगैरा सब ही हराम है।
     ज़ीना कार आदमी दुन्या में भी ज़लिलो ख्वार होता है और आख़िरत में भी इन्तिहाई ज़िल्लत के अज़ाब में गिरफ्तार होगा।
     मेराज की सब हुज़ूर ﷺ ने इनके भी अज़ाब मुलाहज़ा फरमाए।

*बदबूदार गोश्त खाने वाला*
     आक़ा ﷺ का गुज़र ऐसे लोगों पर हुवा जिनके सामने (कुछ) हांडीयो में पका हुवा उम्दा किस्म का और (कुछ में) कच्चा, गन्दा और खराब किस्म का गोश्त रखा हुवा था। ये लोग पके हुवे पाकीज़ा गोश्त को छोड़ कर कच्चा गोश्त खा रहे थे। जिब्राइल ने अर्ज़ किया: ये आप की उम्मत का वो शख्स है जिसके पास हलाल औरत (बीवी) थी मगर ये उसे छोड़ कर खबीस औरत के पास जाता, और ये औरत वो है जो हलाल व तय्यिब मर्द के निकाह में होने के बावुजूद खबीस मर्द के पास जाती।

*उलटे लटके हुवे लोग*
     आक़ा ﷺ ने ज़िनाकारों पर अज़ाब का एक मंज़र ये भी देखा कि कुछ औरतें छातियों से और कुछ पाऊं से लटकी हुई है। जिब्राइल ने अर्ज़ किया: ये वो औरतें है जो ज़ीना करती और अवलाद को क़त्ल कर देती थीं।

*अज़ाबे इलाही से मुतअल्लिक़* #08

*मुंह में आग के पथ्थर*
     आक़ा ﷺ ने कुछ ऐसे लोग भी देखे जिनके होंट ऊंट के होंटों की तरह (बड़े बड़े) थे, उन पर ऐसे अफ़राद मुक़र्रर थे जो उनके होंट पकड़ कर आग के बड़े बड़े पथ्थर उनके मुह में डालते और वो उन के निचे से निकल जाते। जिब्राइल ने अर्ज़ किया: ये वो लोग है (फिर ये आयत पढ़ी) "जो यतीमों का माल ना हक़ खाते है वो तो अपने पेट में निरी आग भरते है।"
     यतीमों का धन दौलत, साज़ो सामान, जागीर व जायदाद अल गर्ज़ किसी भी किस्म का मालो मनाल नाहक़ तौर पर लेने में आख़िरत का शदीद वबाल है। क़ुरआन व हदीस में इसकी बहुत सख्त वईदें आई है जैसा की अभी आपने मुलाहज़ा किया। ख्याल रहे की जहाँ नाहक़ तौर पर यतीमों का माल खाने और उनके साथ बुरा सुलूक करने की वजह से जहन्नम के दर्दनाक अज़ाब की वईदें है वहीं अगर उनके साथ नरमी व एहसान का बर्ताव किया जाए और शफ़क़त व मेहरबानी के साथ पेश आया जाए तो जहन्नम के हौलनाक अज़ाब से नजात की बशारत है।
     फरमाने मुस्तफा ﷺ: उस ज़ात की क़सम जिसने मुझे हक़ के साथ मबऊस फ़रमाया! जिसने किसी यतीम पर रहम किया, उसके साथ नर्म गुफ्तगू की, उसकी यतिमि व कमज़ोरी पर तरस खाया और अल्लाह के अता किये हुवे माल दौलत की फ़ज़ीलत की वजह से अपने पड़ोसी पर तकब्बुर न किया तो अल्लाह बरोज़े क़यामत उसे अज़ाब न देगा।

बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله


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