अल्लाह ने क़ुरआन में 3 मक़ाम पर इस का ज़िक्र फ़रमाया है।1️⃣0️⃣
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*🥀 वाकिआए में'राज 🥀*
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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*अल्लाह ने क़ुरआन में 3 मक़ाम पर इस का ज़िक्र फ़रमाया है।*
*पहला मक़ाम*
सूरए बनी इसराइल में इर्शाद हुआ: पाकी है उसे जो रातो रात अपने बन्दे को ले गया मस्जिदे हराम (काबा) से मस्जिदे अक़्सा (बैतूल मुक़द्दस) तक जिस के गिर्दा गिर्द हमने बरकत रखी कि हम उसे अपनी अज़ीम निशानियां दिखाएँ बेशक वो सुनता देखता है।
*بنى اسراىٔيل، ١*
मुफ़स्सिरीने किराम फ़रमाते है: जब हुज़ूर ﷺ शबे मेराज बुलन्द तरीन मरतबों पर फाइज़ हुवे तो रब ने खिताब फ़रमाया: ऐ मुहम्मद ये फ़ज़ीलत व शरफ में ने तुम्हें क्यूं अता फ़रमाया? आप ﷺ ने अर्ज़ किया: इस लिये कि तूने मुझे अब्दिय्यत के साथ अपनी तरफ मन्सूब फ़रमाया, इस पर ये आयत नाज़िल हुई।
इस आयत में प्यारे आक़ा ﷺ की ज़मीनी सैर (मस्जिदे हराम से बैतूल मुक़द्दस तक) का ज़िक्र है।
*आयत को लफ्ज़ سُبْحٰنٙ से शुरू करने की हिकमत*
अल्लाह ने इस आयत के शुरू में سُبْحٰنٙ الّٙذِىْ कह कर अपनी पाकी बयान फ़रमाई। ये कलिमा तअज्जुब के मौक़ा पर बोला जाता है, उलमा फ़रमाते है: चुकीं वाक़ीआए मेराज बहुत ही हैरत अंगेज़ वाक़ीआ है और इन्सानी अक़्ल वाक़ीआए मेराज बहुत ही हैरत अंगेज़ वाक़ीआ है और इन्सानी अक़्ल से बाला तर। इसी लिये फ़रमाया سُبْحٰنٙ الّٙذِىْ यानी ये उस के इरादे से हुवा जो इज्ज़ से पाक है हर तरह क़ादिर है। हुज़ूर ﷺ के जिस्मे अतहर का ऊपर की तरफ जाना, कुर्रए आग व ज़महरीर से सलामत गुज़र जाना, आसमानों में दाखिल हो जाना, जन्नत व दोज़ख की सैर फरमाना, फिर इस क़दर जल्द वापस आ जाना अगर्चे बहुत मुश्किल मालुम होता है, मगर रब्बे क़दीर के नज़दीक कुछ मुश्किल नहीं।
*गुनाहों से नजात पाने का नुस्खा*
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार खान नईमी رحمة الله عليه फ़रमाते है: जो कोई इस इसमें इलाही का वज़ीफ़ा करे "يٙا سُبْحٰنٙ" पढ़ा करे अल्लाह उसे गुनाहों से पाक फ़रमाएगा। हर इसमें इलाही की तजल्ली आमिल पर पड़ती है जो "يٙا غٙنِى" का वज़ीफ़ा पढ़े खुद गनी और मालदार हो जावे।
बाक़ी अगली पोस्ट में..أن شاء الله
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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